Sunday, May 12, 2013

Funny Jokes in Hindi:


संता का आसान सवाल

संता: चल एक सवाल का जवाब दे.
बंता: पूछ
संता: गाय दूध देती है और  मुर्गी अंडा, पर ऐसा कौन है, जो दोनों देता है?
बंता: मुझे क्या पता?
संता: सिंपल है यार वो अपने पड़ोस में ही हैं ना दुकानदार अंकल.
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युद्ध की कहानी 


पुत्र: पिताजी, युद्ध कैसे शुरू होते हैं…??
पिता: मान लो अमेरिका और इंग्लैंड में किसी बात पर मतभेद हो गया…
मां: लेकिन अमेरिका और इंग्लैंड में मतभेद हो ही नहीं सकता…!!!
पिता: अरे भई, मैं तो सिर्फ उदाहरण दे रहा था…।
मां: मगर तुम गलत उदाहरण देकर बच्चे को बहका रहे हो…!!!
पिता: मैं नहीं बहका रहा हूं…
मां: यह बहकाना नहीं तो और क्या है??
पिता: तुम चुप रहो..! एक बार कह दिया न कि बहका नहीं रहा हूं.
मां: मैं क्यों चुप रहूं.! यह मेरे बच्चे की पढ़ाई का सवाल है…!!! आज ये बोल रहे हो कल को कुछ और गलत बोलोगे…
पुत्र: प्लीज…!!! आप लोग झगड़ा मत करिए….। मैं बहुत अच्छे से समझ गया कि युद्ध कैसे शुरू होते हैं…!!!
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जुबान के पैर 


बेटा (मां से): मां, क्या जुबान के पैर होते हैं?
मां (बेटा से): नहीं बेटा, जुबान के पैर नहीं होते.
बेटा (मां से): तो फिर पिताजी आपसे क्यों बोलते हैं कि तुम्हारी जुबान दिन भर चलती रहती है.
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लड़कियां सैंडल क्यों पहनती हैं


संता: लड़कियां जूते पहनने के बजाए सिर्फ चप्पल या सैंडिल पहनना ही क्यों पसन्द करती हैं?
बंता: ताकि मजनुओं की पिटाई का मौका आने पर वे तुरंत और आसानी से निकल कर हाथों में आ जाएं.




भगवान राम के लिए मीडिया सवाल


मान लीजिएं रामजी ने आज के युग में सीताजी को बचाने संघर्ष किया होता तो उनके साथ क्या होता? आज जहां एक अच्छे इंसान को भलाई के लिए सूली पर चढा देने का रिवाज है क्या वहां रामजी अपना कार्य पूरा कर पाते?

अगर रामजी ने कलयुग में रावण पर आक्रमण किए होते तो उनसे मीडिया किस तरह के सवाल करते:


  • आपने अपनी टीम के महत्वपूर्ण घटक श्री हनुमान को लंका में सीता की खोज करने तथा संदेश देने के उद्देश्य से भेजा था, परन्तु उन्होंने वहां जाकर आग लगा दी… क्या इससे यह साफ नहीं हो जाता कि आपकी टीम में अंदरूनी तौर पर वैचारिक मतभेद हैं…?
  • क्या श्री हनुमान के विरुद्ध अशोक वाटिका उजाड़ने के आरोप में वनविभाग द्वारा मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिए…?
  • आपके एक अन्य सहयोगी श्री सुग्रीव पर अपने भाई महाबली बालि का राज्य हड़पने का आरोप है… क्या आपने इसकी जांच करवाई…?
  • क्या यह सच नहीं है कि बालि का राज्य हड़पने की श्री सुग्रीव की साजिश के मास्टरमाइंड आप स्वयं हैं…?
  • आप 14 साल तक वनवास में रहे… क्या आप स्पष्ट रूप से बता सकेंगे कि आपको वहां अपने खर्चे चलाने के लिए फंड कहां से मिलते रहे…?
  • क्या आपने किसी स्वतंत्र एजेंसी से उस फंड का ऑडिट करवाया है…?
  • क्या आप बताएंगे कि आपने सिर्फ रावण पर हमला क्यों किया, जबकि अन्य अनेक देशों में भी राक्षस शासनारूढ़ थे… क्या यह लंका की सरकार को निजी कारणों से अस्थिर करने की साजिश नहीं थी…?
  • क्या यह सच नहीं है कि रावण को परेशान करने के मकसद से आपने उनके परिवार के निर्दोष लोगों, जैसे कुम्भकर्ण, पर हमला किया…?
  • क्या आपकी टीम के श्री हनुमान द्वारा संजीवनी बूटी की जगह पूरा पहाड उखाड़ लेना सरकारी जमीन के साथ छेड़छाड़ नहीं… क्या आप इसे वन संपदा के साथ भी खिलवाड़ नहीं मानेंगे…?
  • क्या यह सच नहीं कि आपने रावण पर आक्रमण करने से पहले समुद्र पर लंका तक बनाए गए पुल का ठेका नल और नील को अपने करीबी होने के कारण दिया…?
  • बताया गया है कि आपने पुल बनाने के लिए छोटी-छोटी गिलहरियों से भी काम करवाया… क्या इसके लिए आपके विरुद्ध वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम तथा बालश्रम कानून के तहत मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिए…?
  • आपने बिना किसी पद पर रहते हुए युद्ध के समय देवराज इन्द्र से राजकीय सहायताप्राप्त की और उनका रथ लेकर रावण पर हमला किया… क्या इससे आप इन्द्र की ‘टीम ए’ सिद्ध नहीं होते…?
  • क्या इस सहायता के बदले आपने इन्द्र से यह वादा नहीं किया कि अयोध्या का राजा बनने के बाद आप उन्हें अयोध्या के आसपास की जमीन दे देंगे…?
  • स्वर्ग की दूरी अयोध्या की तुलना में कई गुणा अधिक है, परन्तु युद्ध के दौरान आपने अयोध्या से रथ न मंगवाकर इन्द्र से रथ मंगवाया… क्या यह निर्णय इन्द्र की कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नहीं किया गया…?
  • जाम्बवंत द्वारा युद्ध में आपको दी गई सहायता और परामर्श के बदले क्या आपने उन्हें राष्ट्रपति बनाने का वादा नहीं किया…?
  • क्या विभीषण को अपनी टीम में शामिल करके आपने दल-बदल कानून का सरासर उल्लंघन नहीं किया…?
  • और आखिरी सवाल, आपने भरत को राजा बनाया… क्या आपको अपनी नेतृत्व क्षमता पर संदेह था…?

Bollywood Jokes



Bhakt ka guzaris


Bhakt : Meri shadi Aishwarya se kara do.
Bhagwan : Uski ek saree 1 lac ki hai, tu kharcha kar payega.



Bhakt : Koi upay bhagvan
Bhagvan : Mallika Sherawat.

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Raabert had twins



Raabert: Boss, mere dono bachon ke liye koi naam bataiye..
Ajeet: Ek ka naam rakho Peter….
Raabert: boss or doosre ka ?
Ajeet: Repeater.

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What if doctors make flim?

Socho agar doctor film banate to title kya hota?
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1. Kabhi khansi kabhi jukam

2. kaho naa bukhar hai
3. TB no 1
4. Kal patient ho na ho
5. Hum blood de chuke sanam
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Thursday, May 9, 2013

पेशे की इज्जत


यह घटना उन दिनों की है जब फ्रांस में विद्रोही काफी उत्पात मचा रहे थे। सरकार अपने तरीकों से विद्रोहियों से निपटने में जुटी हुई थी। काफी हद तक सेना ने विद्रोह को कुचल दिया था , फिर भी कुछ शहरों में स्थिति खराब थी। इन्हीं में से एक शहर था लिथोस। लिथोस में विद्रोह पूर्णतया दबाया नहीं जा सका था , लिहाजा जनरल कास्तलेन जैसे कड़े अफसर को वहां नियंत्रण के लिए भेजा गया। कास्तलेन विद्रोहियों के साथ काफी सख्ती से पेश आते थे।

इसलिए विद्रोहियों के बीच उनका खौफ भी था और वे उनसे चिढ़ते भी थे। इन्हीं विद्रोहियों में एक नाई भी था , जो प्राय : कहता फिरता – जनरल मेरे सामने आ जाए तो मैं उस्तरे से उसका सफाया कर दूं। जब कास्तलेन ने यह बात सुनी तो वह अकेले ही एक दिन उसकी दुकान पर पहुंच गया और उसे अपनी हजामत बनाने के लिए कहा। वह नाई जनरल को पहचानता था। उसे अपनी दुकान पर देखकर वह बुरी तरह घबरा गया और कांपते हाथों से उस्तरा उठाकर जैसे – तैसे उसकी हजामत बनाई।

काम हो जाने के बाद जनरल कास्तलेन ने उसे पैसे दिए और कहा – मैंने तुम्हें अपना गला काटने का पूरा मौका दिया। तुम्हारे हाथ में उस्तरा था , मगर तुम उसका फायदा नहीं उठा सके। इस पर नाई ने कहा – ऐसा करके मैं अपने पेशे के साथ धोखा नहीं कर सकता था। मेरा उस्तरा किसी की हजामत बनाने के लिए है किसी की जान लेने के लिए नहीं। वैसे मैं आपसे निपट लूंगा जब आप हथियारबंद होंगे। लेकिन अभी आप मेरे ग्राहक हैं। कास्तलेन मुंह लटकाकर चला गया।

एक पेच कसने की कीमत


एक बार एक कारखाने के मालिक की मशीन ने काम करना बंद कर दिया. कई दिनों की मेहनत के बाद भी मशीन ठीक नहीं हो पायी. मालिक को रोज लाखों का नुकसान हो रहा था.

तभी वहाँ एक कारीगर पहुँचा और उसने दावा किया की वो मशीन को ठीक कर सकता है. मालिक  फौरन ही उसे कार्यशाला में ले गया. मशीन ठीक करने से पहले कारीगर ने मालिक से कहा कि वो मशीन तो ठीक कर देगा लेकिन मेहनताना अपनी मर्जी से तय करेगा. मालिक का तो रोज लाखों का नुकसान रोज हो रहा था इसलिये वो मान गया.

कारीगर ने पूरी मशीन का मुआयाना किया और एक पेच को कस दिया. मशीन को चालू किया गया. मशीन ने कार्य करना शुरू कर दिया था. मालिक बहुत खुश हु़आ. कारीगर ने दस हजार रूपया मेहनताना मांगा. मालिक को बहुत आश्चर्य हुआ. केवल एक पेच कसने के दस हजार रूपय! लेकिन उसने अपना वादा निभाया और दस हजार रूपय कारीगर को देते हुये पूछा कि एक पेच कसने के दस हजार रूपय कुछ ज्यादा नहीं हैं?
कारीगर ने तुरंत जवाब दिया – साहब पेच कसने का तो केवल मैंने एक रूपया लिया है बाकि 9999 रूपय तो कौन सा पेच कसना है यह पता करने के लिये हैं.

मालिक उसका जवाब सुनकर बहुत खुश हुआ और उसे अपने कारखाने में एक उच्चपद पर नौकरी पर रख लिया.